लोगों में बढती जागरूकता का दिखा असर, जुलाई माह में आगरा से 160 से अधिक सरीसृपों को किया रेस्क्यू !

जनता के बीच सरीसृपों के बारे में बढ़ती जागरूकता से सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है l अधिक से अधिक लोग किसी भी तरह का सरीसृप दिखने पर संबंधित हेल्पलाइन पर कॉल कर एक जिम्मेदार नागरिक होने का उदहारण दे रहें हैं।

उत्तर प्रदेश वन विभाग और एनजीओ वाइल्डलाइफ एसओएस सरीसृपों को बचाने, लोगों में इनके प्रति जागरूकता फैलाने और डर को कम करने के लिए सक्रिय रूप से काम करती हैl

वाइल्डलाइफ एसओएस रैपिड रिस्पांस यूनिट रेस्क्यू हेल्पलाइन (+91 9917109666) पर प्राप्त हुई कॉल्स के समाधान के लिए चौबीसों घंटे काम करती है, जिसके तहत टीम ने अकेले जुलाई के महीने में ही 167 सरीसृपों को सफलतापूर्वक बचाया है!

पौराणिक कथाओं, लोककथाओं और यहां तक ​​​​कि फिल्मों में भी गलत तरीके से प्रस्तुत किए गए सरीसृपों को लोगों ने हमेशा भय और शत्रुता की नज़रों से ही देखा है, जिससे इस प्रजाति के साथ मानवों के संघर्ष की घटनाएं होती हैं। पहले ईकोसिस्टम में इन सरीसृपों की महत्वपूर्ण भूमिका की जागरूकता में कमी के कारण नज़र पड़ते ही लोग उन्हें उसी क्षण मार देते थे। लेकिन, सांपों की वास्तविकता और उनके महत्व के बारे में ज्ञान और जागरूकता फैलाने के लिए वाइल्डलाइफ एसओएस जैसी संस्थाओं के निरंतर प्रयासों ने अत्यंत गलत समझे जाने वाले इन सरीसृपों के खिलाफ डर को कम करने में काफी मदद की है।

वाइल्डलाइफ एसओएस हर दिन कई सरीसृप बचाव कॉल्स का जवाब देती है। कोबरा और कॉमन क्रेट जैसे जहरीले सांपों से लेकर वुल्फ स्नेक, इंडियन रैट स्नेक और अजगर जैसे गैर विषैले सांपों को शहरभर में बचाती है। वाइल्डलाइफ एसओएस लोगों में संवेदनशीलता फैलाने और सरीसृपों के बारे में ज्ञान प्रदान करने के लिए कई जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएं भी आयोजित करता है।

इस बढ़ती जागरूकता के फलस्वरूप वाइल्डलाइफ एसओएस रैपिड रिस्पांस यूनिट ने जुलाई में आगरा शहर और उसके आसपास से 167 सरीसृपों को बचाया। इनमें 36 इंडियन वुल्फ स्नेक, 27 स्पेक्टेकल्ड कोबरा, 26 इंडियन रैट स्नेक, 34 मॉनिटर लिज़र्ड और यहां तक ​​कि एक मगरमच्छ भी शामिल हैं।

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “बढ़ते शहरीकरण, वनों की कटाई, निर्माण और सिकुड़ते जंगलों की वजह से मानव-सरीसृप संघर्ष की घटनाओं में वृद्धि होती है। मामलों को अपने हाथों में लेने के बजाय हमारी हेल्पलाइन पर कॉल कर एक सूचित निर्णय लेने वाले जागरूक लोगों की संख्या में वृद्धि देखना खुशी की बात है। हमारी टीम में प्रशिक्षित रेस्कुएर शामिल हैं जो हर तरह की परिस्थितियों में कुशलता से कार्य करते हैं।”

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एम.वी ने कहा, “आगरा में बहुत कम सांप प्रजातियां वास्तव में जहरीली होती हैं और यहां तक कि ये सांप भी तब तक हमला नहीं करते जब तक उन्हें छेड़ा या मारने की कोशिश ना की जाए। लोग अब इस बात का अतिरिक्त ध्यान रखते हैं कि सरीसृप को किसी भी तरह की चोट न पहुंचे। हम लोगों से अनुरोध करते हैं कि जब भी वह अपने आसपास किसी भी तरह के सरीसृप को देखें तो उसकी गतिविधियों पर नजर रखें और हमारे हेल्पलाइन नंबर (+91 9917109666) पर इसकी सूचना दें।

ब्यूरो रिपोर्ट