सरकार किसानों को कम से कम 200 रुपए प्रति क्विंटल का बोनस दे- सुमन

सादाबाद। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रामजीलाल सुमन ने साधन सहकारी समितियों पर गेहूं की खरीद न होने का कारण सरकार की अव्यावहारिक नीति बताया है।
उन्होंने कहा कि जब बाजार में किसानों को क्रय केंद्र की तुलना में ज्यादा भाव मिल रहा है तो वो भला सरकारी केंद्रों पर अपना गेहूं क्यों बेचेगा। श्री सुमन सादाबाद डाक बंगले पर पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे, उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम. एस. पी.) 1975 रुपए प्रति क्विंटल था और इस वर्ष यह 2015 रूपए प्रति क्विंटल है, मात्र 40 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है, जबकि खाद बीज तो महंगे हुए ही है साथ में डीजल का भाव भी आसमान छू रहा है। सरकार जब न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है तो उसे किसानों की समस्त परेशानियों एवं उत्पादन लागत का ध्यान अवश्य रखना चाहिए। कहा कि विभिन्न जनपदों में जिलाधिकारियों द्वारा क्रय केंद्रों पर कार्यरत कर्मचारियों पर दबाव बना कर उनके खिलाफ कार्यवाही की धौंस भी दी जा रही है, ये कैसा मजाक है? जब सरकारी खरीद केंद्रों पर 2015 रुपए प्रति क्विंटल भाव है और बाजार में किसान को गेहूं धडल्ले से 2200 रुपए प्रति क्विंटल बिक रहा है तो सरकार अंधेरे में तीर क्यों चला रही है? सहकारी समितियों पर किसानों के गेहूं खरीदने से पूर्व पंजीकरण कराया जाता है, कोई किसान पंजीकरण कराने को तैयार नहीं है, किसानों के सामने जो समस्याएं हैं सरकार उनको नजरंदाज कर रही है, किसानों को सहकारी समितियों से डी. ए. पी., यूरिया यानी खाद और बीज उधार मिलता था लेकिन विगत कई वर्षों से खाद और बीज नकद मिलता है, किसान जब सहकारी समिति से कर्जा लेता है तो पहले किसान को संभावित कर्ज का 10 प्रतिशत हिस्सा समिति पर जमा करना पड़ता है. स्थिति यह है कि किसानों को कर्ज तो मिला नहीं, पूरे प्रदेश में अरबों-खरबों रुपया समितियों पर किसानों का जमा है। प्रधानमंत्री 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की निरंतर घोषणा करते रहे हैं जो सत्यता से परे है, पहले सरकार किसानों की समस्याओं को समझे और उसका निवारण करे, खेती लाभकारी बनाई जाए, सरकार यदि चाहती हैं। कि किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर अपना गेहूं बेचे तो गेहूं पर कम से कम 200 रुपए प्रति क्विंटल बोनस की घोषणा करनी चाहिए, पूर्व में भी इस प्रकार का बोनस दिया जाता रहा है, सरकारी क्रय केंद्रों पर किसान अपना गेहूं बेचे इसके लिए बोनस के आकर्षण के अलावा और कोई विकल्प नहीं है।

संवाददाता : सुरेश चंद वार्ष्णेय