श्री मनकामेश्वर नाथ जी मंदिर प्रांगण में चल रही रामलीला में राम भरत मिलाप का मनमोहक दृश्य

Reporter : Mukul Sharma

श्री रामचरित मानस महज धार्मिक ग्रंथ नहीं है, अपितु ये ज्ञान के अथाह सागर है। ये हमें जीवन जीने की कला सिखाते हैं।

आज के लीला प्रसंग में भरत का अयोध्या लौटना, भरत का राम को लाने के लिए वनगमन, भरत निषाद वार्ता, राम भरत मिलाप, शूर्पनखा कथा व खरदूषण वध , सीता हरण, जटायु उद्गार, शबरी लीला,व सुग्रीव मिलन का प्रमुख रहे।

रामायण के सबसे सुंदर प्रसंग राम-भरत मिलाप के दृश्यों ने दर्शकों के मन को छू लिया। आज के भौतिकवादी युग में जहां भाई-भाई खून के प्यासे बने हुए हैं, वहां भरत का त्याग व प्रेम अंधी आधुनिकता के लिए आदर्श उदाहरण है।

वन में सीता को एक अशुभ स्वप्न आता है जिसमें माताओं को मलिन भेष में देखती हैं। भरत राम से मिलने आते हैं और पिता की मृत्यु के बारे में बताते हैं। इस पर राम दु:खी होते हैं, बाद में भरत को वापस लौटने के लिए कहते हैं।

अश्रुपूर्ण विनती के पश्चात भी राम वचन मे बंधे हुए अयोध्या लौटने को तैयार नहीं है। भरत अपने भ्राता से चरण पादुका देने के लिए कहते हैं। ये पादुका ही चौदह वर्षों तक राम का प्रतीक बनकर शासन करेगी और भरत एक सेवक के रूप मे कार्य करेंगे। भरत राम की खड़ाऊ अपने सर पर रखकर ले जाते हैं।

रामायण के अनुसार जब भगवान श्रीराम वनवास अवधि में थे, तो इसी दौरान उनकी भेंट महर्षि अगस्त्य से हुई थी। भगवान के प्रयोजन को समझते हुए महर्षि ने ही उन्हें धर्मयुद्ध के लिए दिव्य वैष्णव धनुष, सूर्यसमान तेजस्वी धनुष, तीक्ष्ण बाणों वाले तूरीण, महाखड्ग और अमोघ कवच प्रदान किया था। इसके अलावा लंका चढ़ाई के दौरान रामसेतु निर्माण के लिए जल विखंडन विधि का ज्ञान भी महर्षि ने श्रीराम को दिया था।

भगवान राम पंचवटी की स्थापना करते हैं, जहां सूपर्णखा प्रणय निवेदन करती है और क्रोधित लक्ष्मण उसकी नाक काट देते है।
हैं। सूपर्णखा अपने भाई रावण को जाकर यह बात बताती है। इसके बाद रावण क्रोध में आकर सीता का हरण कर लेता है।

इससे पहले मारीच हिरण की लीला का भी मंचन किया जाता है। सीता श्रीराम को हिरण लाने की जिद करती है। श्रीराम उसे लेने जंगल की ओर चले जाते हैं।

जैसे ही राम उस हिरण पर बाण चलाते हैं, मारीच अपने असली रूप में आ जाता है और जोर-जोर से लक्ष्मण और सीता को पुकारने लगता है और कुछ ही समय में अपने प्राण त्याग देता है।

उधर सीता ये आवाजें सुनकर चिंतित हो जाती हैं उन्हें लगता है कि उन्हें राम ने पुकारा है परंतु लक्ष्मण को यकीन है कि उन्हें राम ने नहीं पुकारा है। परंतु सीता ये मानने को तैयार नहीं होतीं, सीता को लगता है कि उसके पति राम मुश्किल में हैं और सीता जिद्द करती हैं लक्ष्मण से कि वो राम की रक्षा करने के लिए जाए। लक्ष्मण अपने भाई राम की आज्ञा का पालन कर रहे हैं, वो सीता को अकेला छोड़कर नहीं जाना चाहते, परंतु क्रोध में सीता लक्ष्मण को कायर कहती है और राम के पास जाने को कहती है।
तभी रावण साधु का रूप धारण करके माता सीता का हरण कर लेता है।

रास्ते में जटायु नाम का पक्षी रावण को रोकने की कोशिश करता है, जटायु और रावण युद्ध का भी मंचन किया गया।
श्रीराम और लक्ष्मण को जटायु मिलता है और बताता है कि सीता को रावण उठा ले गया है और देवी सीता रावण की लंका पहुंच जाती है।

इसके बाद वे आगे चले और रास्ते में शबरी से मुलाकात हुई। शबरी के जूठे बेर खाने के बाद भगवान राम की सुग्रीव से मित्रता हुई। हनुमान जी का अवतार भी लीला में दिखाया गया।

इन लीलाओं को देखकर भक्त भावविभोर हो जाते हैं।

आज आरती के समय अशोक कुलश्रेठ, रवि माथुर (पार्षद), राकेश जैन ( पार्षद) , वर्षा शर्मा (पार्षदा), डा. पंकज महेन्द्रू ,डॉ रेनु महेंद्रू,डॉ दीपिका प्रवीन गुप्ता, आदि उपस्थित रहे।

व्यवस्था दीप्ति गर्ग, पूजा बंसल, भावना अग्रवाल, बबीता अग्रवाल, कविता, रतिका, सपना तिवारी, वर्षा आदि ने सँभाली ।

अतिथियों का स्वागत हरिहर पुरी, बंटी ग्रोवर, थानेश्वर तिवारी, ने किया व शुभाशीर्वाद महंतश्री योगेश पुरी जी ने ।

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