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लखनऊ में सपा का अधिवेशन

संवाददाता : हेमंत चौहान

लखनऊ में सपा का अधिवेशन: बीजेपी पर हमलावर रहेंगे अखिलेश, मायावती के वोटों पर होगी नजर 28 से 29 सितंबर तक चलने वाला अधिवेशन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होगा. इसमें देशभर से 25000 पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं. पार्टी ने चुनाव अधिकारी प्रोफेसर रामगोपाल यादव को नामित किया है. वहीं यूपी में नवंबर-दिसंबर में निकाय चुनाव होने हैं. 2024 में लोकसभा चुनाव भी होंगे. ऐसे में चुनावी रणनीति के बारे में पार्टी के वरिष्ठ नेता चर्चा करेंगे.
लखनऊ. समाजवादी पार्टी (सपा) का दो दिवसीय अधिवेशन बुधवार से लखनऊ में शुरू हो रहा है. पहले दिन प्रांतीय सम्मलेन में प्रदेश अध्यक्ष पद पर मुहर लगेगी. वहीं गुरुवार को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाएगा. उम्मीद जताई जा रही है कि नरेश उत्तम पटेल दुबारा प्रदेश अध्यक्ष बनेंगे, वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर अखिलेश यादव की तीसरी बार ताजपोशी तय है. अधिवेशन में सपा ने पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं और दलितों के मुद्दे अधिवेशन में उठाने का दावा किया है. ऐसे में जाहिर है सपा मुखिया अखिलेश की नजर अब बसपा के मूल वोटर दलितों पर है. वहीं पार्टी बीजेपी पर हमलाकर चुनावी रणनीति को धार देगी.
समाजवादी पार्टी ने लोहिया वाहिनी की तर्ज पर अंबेडकर वाहिनी का भी गठन किया है, लेकिन लोहिया वाहिनी की तरह अभी अंबेडकर वाहिनी का ढांचा प्रदेश में खड़ा नहीं हो पाया है. ऐसे में अधिवेशन के बाद सपा की रणनीति अब अंबेडकर वाहिनी को सक्रिय करना है, ताकि अधिक से अधिक दलित समाज को सपा से जोड़ा जा सके.
25 हजार प्रतिनिधि जुटने की संभावना, कई प्रस्ताव होंगे पास
28 से 29 सितंबर तक चलने वाला अधिवेशन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक होगा. इसमें देशभर से 25000 पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं. पार्टी ने चुनाव अधिकारी प्रोफेसर रामगोपाल यादव को नामित किया है. वहीं यूपी में नवंबर-दिसंबर में निकाय चुनाव होने हैं. 2024 में लोकसभा चुनाव भी होंगे. ऐसे में चुनावी रणनीति के बारे में पार्टी के वरिष्ठ नेता चर्चा करेंगे. साथ ही आर्थिक व राजनीतिक प्रस्ताव पेश कर उन पर मंथन किया जाएगा. अधिवेशन की शुरुआत में 10 बजे झंडारोहण समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव करेंगे. सम्मेलन का उद्घाटन भी राष्ट्रीय अध्यक्ष द्वारा किया जाएगा. इसी दिन आर्थिक-राजनीतिक प्रस्ताव पेश होगा, जिस पर प्रतिनिधि सम्मेलन में चर्चा होगी. साथ ही वर्तमान की राजनीतिक स्थिति, केन्द्र-राज्य सरकार की नीतियों और देश की ज्वलंत समस्याओं पर भी विचार होगा
सपा का वोट शेयर बढ़ा फिर भी रह गई थी सत्‍ता से दूर
2017 में सपा का वोट प्रतिशत करीब 22 फीसद था. उसके हाथ 47 सीटें लगी थीं. 2022 के चुनाव में सपा का वोट शेयर 31.9 फीसदी रहा है. पिछले चुनाव के मुकाबले उसे कहीं ज्‍यादा वोट मिले. लेकिन,वह 111 सीटों पर सिमट कर रह गई. ऐसे में सत्ता से दूर रह गई. अब उसकी नजर बसपा के वोट में सेंध लगाने की है
घटा बसपा का वोट शेयर
2012 के चुनाव में बसपा का वोट शेयर 25.9 फीसद रहा था. इस वोट शेयर के कारण उसे 80 सीटें मिली थीं. 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी को 22.4 फीसद वोट मिले. उसकी सीटें 80 से घटकर 19 रह गईं. 2022 के चुनाव में बीएसपी का वोट शेयर और घटा है. यह कम होकर 12.7 फीसदी रह गया है. बसपा एक सीट पर सिमट गई.