जीएसटी में सुधार होना चाहिएः मुख्य सचिव से मिलकर रखी मांग

जीएसटी रिटर्न रिवाईज की सुविधा होनी चाहिए
कैश लेजर में जमा टैक्स पर ब्याज न वसूला जाये
जीएसटीआर-2 को लागू करें
धारा-149 अधिसूचित हो
रिवोकेशन प्रक्रिया को आसान बनाये
लखनऊ: एसोसिएशन आफ टैक्स पेयर्स एंड प्रोफॅशनल का प्रतिनिधि मंडल ने प्रदेश मुख्य सचिव से भेंट कर 15 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
प्रस्तुत ज्ञापन में मांग रखी गयी कि मासिक या त्रैमासिक रिटर्न फाॅर्म को अगले रिटर्न दाखिल होने तक रिवाईज करने की सुविधा प्रारम्भ होनी चाहिए। इसके साथ ही कम्पोजिशन डीलर्स को दाखिल करने वाला जीएसटीआर-4 को समाप्त करते हुए जीएसटीआर-9ए पुनः लागू करें, चाहे तो त्रैमासिक रिटर्न जो पहले जीएसटीआर-4 दाखिल होता था, उसको प्रक्रिया को पुनः लागू करें। धारा-46 में पंजीकृत डीलर्स को डिफाॅल्टर कहा गया है जबकि धारा-62 में ऐसे डिफाल्टर डीलर्स को नान-फाइलर कहा जाता है, अतः डिफालटर शब्द को एक्ट से हटाया जाना चाहिए। रिवोकेशन प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए। सरकार को ऐसी व्यवस्था रखनी चाहिए जो भी नान-फाइलर जब कभी रिवोकेशन कराना चाहे उसके लिए पोर्टल पर व्यवस्था हो कि निर्धारित लेटफीस जमा करने के 36 घंटे के बाद स्वतः ही पोर्टल पर आईडी खुल जाये और नान-फाइलर डीलर्स का पंजीयन स्वतः रिवोकेशन होते ही वह आसानी से रिटर्न अपलोड कर सके।
करचोरी रोकने के लिए अविलम्ब ही जीएसटीआर-2 को पोर्टल पर एक्टिवेट करें ताकि खरीदार पर खरीद पर पुनः टैक्स जमा करने का बोझ न पड़े। एक्ट की धारा-67 बहुत ही पीड़ा दायक व्यवस्था है। सर्च एवं सर्वे के दौरान और पश्चात ही पंजीकृत डीलर्स को करचोर घोषित करते हुए उपलब्ध माल को जब्त करने की व्यवस्था विधि विरुद्ध है। ऐसी व्यवस्था तो आयकर में भी नहीं है। फिर सक्षम अधिकारी चाहे तो पंजीकृत डीलर्स को गिरफ्तार भी कर सकता है। क्योंकि वह सम्मानित व्यापारी है न कि कोई चोर। जब जीएसटी एक कर-एक टैक्स पर आधारित है तो प्रदेश के बाहर के डीलर्स का वाहन पकड़े जाने पर अस्थायी आईडी पर टैक्स व अर्थदंड जमा कराया जाना, जीएसटी की भावना के विरुद्ध है। इसमें बदलाव किया जाना चाहिए।
4 साल व्यतीत होने के बावजूद भी अधिकरण स्थापित नहीं हो पायी है अतः शीघ्र ही जीएसटी अधिकरणों की स्थापना करनी चाहिए। यदि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीान है कि शासन गंभीरता से पैरवी करते हुए मामले को सुलझाये।
विभागीय अधिकारी वैट की प्रक्रिया के अनुसार ही काम कर रहे हैं जबकि जीएसटी में प्रक्रिया एवं काम अलग है, अतः अधिकारियों के दायित्वों पर पुनः विचार एवं समीक्षा करनी चाहिए। धारा-149 को अधिसूचित करना चाहिए, यह धारा डीलर्स के लिए लाभदायक है।
शीघ्र ही प्रदेश के खुदरा व्यापारियों के लिए खुदरा व्यापार नीति को बनाया जाना चाहिए। आजादी के बाद आज तक छोटे खुदरा व्यापारियों को संगठित क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया और न ही सुरक्षा और सुरक्षा प्रदान किया जाता है। अतः नीति को बनाकर पंजीकृत डीलर्स को जमा टैक्स के आधार पर वार्षिक मेडिक्लेम पालिसी उपलब्ध कराया जाये, साथ ही मुख्यमंत्री दुघर्टना बीमा योजना का विस्तार किया जाऐ, इस योजना के लाभाथियों को क्लेम का भुगतान प्राप्त करने के लिए समयसीमा निश्चित किया जाये, जिस प्रकार से सरकार टैक्स समयसीमा में वसूलती है लेकिन क्लेम को कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है।
मुख्य सचिव जी ने आश्वासन दिया कि आपके द्वारा प्रस्तुत ज्ञापनों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र ही जीएसटी परिषद को प्रेषित किये जाएंगे।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राष्ट्रीय महासचिव पराग सिंहल (आगरा) ने किया। सदस्य के रुप में प्रांतीय अध्यक्ष प्रमोद राजे (सुल्तानपुर), प्रांतीय महासचिव आशुतोष सिंघल (हापुड़) एवं शिवम बंसल (गाजियाबाद) थे।

संवाददाता डॉ मनोज गुप्ता