पतंग के मांझे के फसी चील को बचाया, वाइल्डलाइफ एसओएस में चल रहा उपचार

आगरा के ताजगंज में जानलेवा पतंग के मांझे में फसी चील, पेड़ से लटकी मिली। वाइल्डलाइफ एसओएस रैपिड रिस्पांस यूनिट ने पक्षी को सुरक्षित रूप से पेड़ से नीचे उतार, उसके शरीर से मांझा हटाया l वर्तमान में चील को चिकित्सकीय देखरेख में रखा गया है।

वाइल्डलाइफ एसओएस रैपिड रिस्पांस यूनिट को खतरनाक स्थिति में फंसी चील के बारे में एनजीओ की बचाव हेल्पलाइन (9917109666) पर सूचना प्राप्त हुई। आगरा के ताजगंज क्षेत्र में एक पेड़ की शाखाओं पर लटकती दिखाई दी चील के पंखों के चारों ओर मांझा फसा हुआ था, जिससे मुक्त होने में वह असमर्थ थी। चील को गंभीर हालत में देख, पास के एक निवासी ने तुरंत वाइल्डलाइफ एसओएस को कॉल कर उनसे सहायता मांगी।

आवश्यक बचाव उपकरणों से लैस दो सदस्यीय टीम घटनास्थल पर पहुंची और संकटग्रस्त पक्षी को पेड़ से सावधानीपूर्वक नीचे उतारा। चूंकि मांझे ने चील को चारों ओर से कसकर जकड़ा हुआ था, पक्षी को तत्काल चिकित्सकीय सहायता के लिए वाइल्डलाइफ एसओएस के अस्पताल लाया गया।

वाइल्डलाइफ एसओएस को सूचना देने वाले, यशवेद भारद्वाज ने बताया, “अनेक प्रयासों के बाद भी चील खुद को आज़ाद कर पाने में असमर्थ रही और संघर्ष करती रही, इसलिए हमने ऑनलाइन वाइल्डलाइफ एसओएस का नंबर खोजा और तुरंत संपर्क साधा। वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम वक़्त रहते स्थान पर पहुंची और कुशलतापूर्वक बचाव अभियान को अंजाम दिया। ”

वाइल्डलाइफ एसओएस के पशु-चिकित्सा सेवाओं के उप-निदेशक, डॉ इलियाराजा ने कहा, “विस्तृत चिकित्सकीय जांच में पता चला कि चील के दाहिने पंजे पर घाव है और वह काफी थकी हुई है। हम सभी आवश्यक उपचार प्रदान कर रहे हैं और जल्द ही ठीक होने पर उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ देंगे। ”

वाइल्डलाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहा, “हमें खुशी है कि लोग ऐसी घटनाओं के बारे में वाइल्डलाइफ एसओएस को सूचित करके सही कदम उठा रहे हैं। यह सोचने वाली बात है, कि सरकार द्वारा प्रतिबंध के बावजूद मांझे का खतरा जारी है। चूंकि पक्षी सुबह या शाम के समय अधिक सक्रिय होते हैं, इसलिए हम जनता से इस समय के दौरान पतंग उड़ाने से परहेज करने का अनुरोध करते हैं। खुले स्थानों का उपयोग करना और सूती धागे या प्राकृतिक फाइबर मांझा के प्रयोग से संबंधित मौतों के जोखिम को कम किया जा सकता है और कई लोगों की जान बचाने में मदद मिल सकती है।”

ब्लैक काइट (मिल्वस माइग्रेंस) शिकारी पक्षियों में एक मध्यम आकार का पक्षी है। हालांकि, लगातार कम होते जंगल, पेड़, शिकार और कृषि कीटनाशकों के उपयोग के कारण इनकी संख्या में गिरावट या उतार-चढ़ाव का अनुभव हुआ है। ब्लैक काइट (चील) शिकारी होते हैं, लेकिन ज़्यादातर वे बचे हुए मास के टुकड़े पर ही भोजन करते है। उनके आहार में विभिन्न प्रकार की मछली, सरीसृप, और अन्य छोटे जानवर और पक्षी भी शामिल हैं।

एक अन्य घटना में, वाइल्डलाइफ एसओएस ने कैलाश नगर, वृंदावन, मथुरा में जंगली कुत्तों के झुंड द्वारा घायल हुए स्पॉटेड आऊलेट को भी बचाया। उल्लू के दाहिने पंख में घाव हैं और वर्तमान में उसे एनजीओ की गहन देखभाल में रखा गया है।

संवाददाता मनोज गुप्ता

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