सेंटर फॉर अर्वन एंड रीजनल एक्सीलेंस का पानी पर कार्य

पेयजल मानव का मौलिक अधिकार है और जीवन के लिए अपरिहार्य है किन्तु हमारी अदूरदर्शिता व नियोजन की कमी के कारण सुजलाम भारत पानी के लिए संघर्ष कर रहा है नीति आयोग की रिपोर्ट 2030 तक देश के कई शहरों में भूगर्भ जल समाप्ति का अंदेशा व्यक्त कर चुकी है जिसमे हमारा शहर आगरा भी शामिल है
संस्था – सेंटर फॉर अर्वन एंड रीजनल एक्सीलेंस विगत 19 वर्षो से आगरा की मलिन बस्तियों में स्वच्छता स्वास्थ व पानी के विषय पर कार्य कर रही है और समुदाय को उक्त विषयों पर लगातार जागरूक कर रही है संस्था क्योर यू एस ए आई डी के साथ मिलकर पानी और स्वच्छता पर समुदाय को जागरूक कर रही है
संस्था द्वारा सतीनगर नरायच क्षेत्र में समुदाय के सहयोग से वाशपार्क वॉटर एंड सेनिटेशन पार्क विकसित किया जा रहा है वाशपार्क में जल संबधी विभिन्न मॉडल विकसित किए जा रहे है
वर्षा जल संचयन हेतु 20 फीट गहरी व 14 फीट चौड़ी भूमिगत टंकी का निर्माण विशुद्ध पुरानी पद्धति से किया जा रहा है जिसमे प्रतिवर्ष 50 से 55 हजार लीटर वर्षाजल संचयित किया जायेगा टंकी निर्माण हेतु पत्थर की ईंट खंडा व पत्थर की पटटियो का इस्तेमाल किया गया है टंकी के पानी का प्रयोग विध्यालय के बच्चो व समुदाय द्वारा किया जायेगा जिससे कि पानी की समस्या में राहत मिल सके
वर्षाजल को भूमिगत जलस्तर को सुधार हेतु रिचार्ज भी किया जा रहा है भूगर्भ जल को रिचार्ज करने हेतु लगभग 1000 वर्गफुट छत के वर्षा जल को उपयोग में लिया जा रहा है
रसोई व स्नानघर इत्यादि के अनपयोगी जल को उपचार कर पुनः प्रयोग हेतु जागरूक किया जा रहा है
जल के उपचार कर पुनः प्रयोग हेतु डी वाट प्रणाली स्थापित की जा रही है जिससे कि जल का समुचित प्रयोग किया जा सके
जब तक कि हम जल की प्रत्येक बूंद का सम्मान नहीं करेंगे तब तक जीवन संकट में रहेगा

Leave a Reply

Your email address will not be published.